छतरपुर।। बुन्देल खंड की पुरानी कहावत है “कपड़े है नहीं बीच में लेटूगा”तर्ज पर ट्रैक्टर संचालकों ने अपने ट्रैक्टरों की धमा चौकड़ी से पूरे शहर के लोगों की नाक में दम कर रखी है शहर के किसी भी इलाके पर नजर डालो तो 5-10 ट्रैक्टर सरपट दौड़ते हुए नजर आ जाएंगे पकड़ने वाली बात तो यह है कि इन ट्रैक्टरों पर किसी भी अधिकारी की नजर नहीं है ना यातायात विभाग इन पर नकेल कसता है और ना परिवहन विभाग इनके कागजातों की कभी जांच पड़ताल करता है जिस कारण इन्हें पूरे शहर में धमाचौकड़ी मचाने की छूट मिली हुई है |
यह ट्रैक्टर केवल दुर्घटनाओं का कारण ही नहीं बनते हैं बल्कि शासन को लाखों रुपए राजस्व की चपत भी लगाते हैं सूत्र बताते हैं के पूरे जिले में 18000 से भी अधिक ट्रैक्टर आरटीओ में पंजीकृत है लेकिन केवल 370 ट्रैक्टर संचालकों ने ही शासन को टैक्स दिया है बाकी ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए पंजीकृत किए गए हैं सरकार उन ट्रैक्टरों से रोड टैक्स नहीं लेती है जिन ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन कृषि कार्य के लिए किया जाता है सोचने वाली बात जिन ट्रैक्टरों का पंजीयन कृषि कार्य के लिए किया गया है उन्हें शहर में बालू पत्थर इट लादकर धमाचौकड़ी मचाने के बाद भी जिम्मेदार विभाग आंखों पर पट्टी बांधे रहते हैं बताते चलें कि शहर में कई ऐसी दुर्घटनाएं हुई जिनके लिए ट्रैक्टर जिम्मेदार हैं फिर भी शहर के तमाम स्थानों पर बालू लदे ट्रैक्टर किसी भी वक्त खड़े देखे जा सकते हैं इन ट्रैक्टर संचालकों ने कई स्थानों को तो मंडी के रूप में परिवर्तित कर दिया है यदि ट्रैक्टर संचालकों को अपने ट्रैक्टरों से व्यवसाय ही करना है तब फिर उन्हें रोड टैक्स देना होगा और जिम्मेदार विभागों को इन पर कड़ी कार्यवाही कर राजस्व की बसूली करनी होगी तभी इन बेलगाम संचालकों की अक्ल ठिकाने लगेगी।